बांस की खेती से आत्मनिर्भर बनेंगे पहाड़िया किसान, 42 किसानों को मिला प्रशिक्षण।
राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत बरहेट के कुसमा पंचायत में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, प्रति एकड़ 160 बांस के पौधे वितरित कर किसानों को दी जाएगी वैज्ञानिक खेती की जानकारी।

साहिबगंज। जिले में पहाड़िया समुदाय के किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला उद्यान कार्यालय, साहिबगंज की ओर से बरहेट प्रखंड के कुसमा पंचायत में 42 पहाड़िया किसानों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसका उद्देश्य किसानों को बांस की खेती के प्रति जागरूक करना, वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी देना तथा बांस आधारित आजीविका के नए अवसरों से परिचित कराना है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बांस के पौधों के रोपण, खेत की तैयारी, पौधों के बीच उचित दूरी, सिंचाई, मिट्टी एवं नमी प्रबंधन और पौधों की देखभाल से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही रोगों एवं कीटों से बचाव, बेहतर उत्पादन और बांस के व्यावसायिक उपयोग के बारे में भी बताया जाएगा, ताकि किसान उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग कर सकें।

कार्यक्रम के तहत किसानों को प्रति एकड़ 160 बांस के पौधे वितरित किए गए। पौधों के वितरण के साथ उनके उचित रोपण और शुरुआती अवस्था में देखभाल की जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है। किसानों को बांस की खेती व्यवस्थित तरीके से अपनाने और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बांस का उपयोग विभिन्न कृषि, घरेलू और व्यावसायिक कार्यों में किया जाता है। ऐसे में इसकी खेती पहाड़िया समुदाय के किसानों के लिए भविष्य में आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का अवसर बन सकती है। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को बांस की मांग, उपयोगिता और इससे जुड़ी आजीविका गतिविधियों की जानकारी देकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला उद्यान पदाधिकारी रविकांत रजक उपस्थित रहे। उनके साथ जिला जीविका प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार, प्रेम पासवान, राष्ट्रीय प्रशिक्षक विकास पासवान एवं अभिषेक कुमार, जीवीटी (GVT) टीम लीडर मनोज कुमार पाल, ग्राम प्रधान मौसा पहाड़िया सहित संबंधित कर्मी और किसान मौजूद रहे।

कुसमा पंचायत में शुरू किया गया यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पहाड़िया समुदाय के किसानों को कृषि आधारित आजीविका के नए विकल्पों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों में बांस की वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ने और भविष्य में स्वरोजगार की संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है।




