बंधुआ मजदूरी के मामलों में जांच के बाद ही विमुक्ति की कार्रवाई सुनिश्चित करें: उप विकास आयुक्त।
विमुक्त बंधुआ मजदूरों को सभी पात्र सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने का निर्देश, महिला स्वयं सहायता समूहों को अधिक ऋण उपलब्ध कराने पर जोर।

पाकुड़। उप विकास आयुक्त, पाकुड़ अरविन्द कुमार लाल की अध्यक्षता में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, पहचान एवं बचाव के लिए गठित सतर्कता समिति एवं रेस्क्यू टीम के सदस्यों के साथ समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बंधुआ मजदूरी की पहचान, रोकथाम, रेस्क्यू एवं विमुक्ति की कार्रवाई को प्रभावी बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने निर्देश दिया कि बंधुआ मजदूरी से संबंधित किसी भी शिकायत पर पहले मामले की समुचित जांच की जाए। जांच के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में बंधुआ मजदूर है या नहीं। जांच के उपरांत ही नियमानुसार विमुक्ति की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि विमुक्त किए गए बंधुआ मजदूरों को सरकार की सभी पात्र सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें पुनर्वास के साथ-साथ आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें और वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
श्रम अधीक्षक, पाकुड़ गिरीश चन्द्रा ने कहा कि बंधुआ मजदूरों के रेस्क्यू एवं विमुक्ति की कार्रवाई के दौरान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पूर्णतः पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित टीम के सदस्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बैठक के दौरान बंधुआ मजदूर समिति के सदस्य पीटर मरांडी ने माइंस क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी एवं बाल श्रम के खिलाफ व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को उनके अधिकारों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

उप विकास आयुक्त ने अग्रणी बैंक प्रबंधक को निर्देश दिया कि महिला स्वयं सहायता समूहों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी।बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारी, सतर्कता समिति के सदस्य एवं रेस्क्यू टीम के सदस्य उपस्थित थे।




