झारखंड

बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम एवं प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित।

श्रमिकों के पंजीकरण, सरकारी योजनाओं के लाभ एवं बाल श्रम उन्मूलन पर अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारी।

पाकुड़। श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को हिरणपुर, लिट्टीपाड़ा एवं पाकुड़िया प्रखंड सभागारों में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, बाल श्रम निषेध तथा प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों एवं कल्याणकारी योजनाओं को लेकर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए जनसहभागिता को बढ़ावा देना था।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि बंधुआ मजदूरी एवं बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों का समूल उन्मूलन तभी संभव है, जब जनप्रतिनिधि, प्रशासन और आम नागरिक मिलकर सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि उन्हें सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं सहायता कार्यक्रमों का लाभ मिल सके।

कार्यक्रम के दौरान श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम तथा प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों एवं पंजीकरण प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रवासी श्रमिकों का निबंधन होने से उन्हें विभिन्न सरकारी सुविधाओं, सुरक्षा उपायों तथा आपातकालीन सहायता का लाभ प्राप्त हो सकता है।

उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों अथवा क्षेत्रों में जाने वाले सभी श्रमिकों का अनिवार्य रूप से प्रवासी श्रमिक के रूप में पंजीकरण कराएं। इससे आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन उन्हें आवश्यक सहयोग एवं सुरक्षा प्रदान कर सकेगा।

बाल श्रम के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि किसी भी क्षेत्र में बच्चों से मजदूरी कराई जाती हुई दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित प्रखंड के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी को दें, ताकि दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यशाला में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, विभिन्न पंचायतों के मुखिया, जनप्रतिनिधि, श्रम विभाग के कर्मी, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा तथा बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी मुक्त समाज के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

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