प्लेटिनम जुबली व्याख्यानमाला में गूंजे साहिबगंज महाविद्यालय के गौरवशाली अतीत के संस्मरण।
पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश्वर प्रसाद और पूर्व प्राचार्य डॉ. मृदुला सिन्हा ने साझा किए अनुभव, विद्यार्थियों को अध्ययन व अनुशासन का दिया संदेश।

साहिबगंज। साहिबगंज महाविद्यालय के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्लेटिनम जुबली समारोह के तहत चल रही व्याख्यानमाला के दूसरे दिन अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश्वर प्रसाद एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. मृदुला सिन्हा ने शिरकत की। दोनों वरिष्ठ शिक्षाविदों ने अपने लंबे शैक्षणिक अनुभवों और महाविद्यालय से जुड़े संस्मरण छात्र-छात्राओं के साथ साझा किए।
अतिथि व्याख्यान के दौरान डॉ. सुरेश्वर प्रसाद ने वर्ष 1964 में साहिबगंज महाविद्यालय में सेवा प्रारंभ करने से लेकर वर्तमान समय तक की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय प्राध्यापक विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करने और उनकी शैक्षणिक समस्याओं को दूर करने के लिए पूरी निष्ठा एवं मेहनत से कार्य करते थे।
उन्होंने महाविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं संस्थागत विकास के विभिन्न चरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ महाविद्यालय ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके संस्मरणों ने उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को भावुक कर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के प्रति गंभीर रहने और अपने शिक्षकों के अनुभवों से सीख लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने डॉ. सुरेश्वर प्रसाद एवं डॉ. मृदुला सिन्हा का अंगवस्त्र एवं पौधा भेंटकर सम्मान किया। प्राचार्य ने कहा कि महाविद्यालय की इन अमूल्य धरोहरों से वर्तमान विद्यार्थियों का परिचय कराना गौरव की बात है। वरिष्ठ शिक्षाविदों का अनुभव महाविद्यालय के लिए बहुमूल्य विरासत है, जिससे नई पीढ़ी को निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहेगा।उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन के साथ पाठ्य-सहगामी गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।

पूर्व प्राचार्य डॉ. मृदुला सिन्हा ने विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति घटती रुचि पर चिंता जताते हुए उन्हें अध्ययन के प्रति गंभीर और अनुशासित रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ज्ञान को जीवन का आधार बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों से भी भावी पीढ़ी को ज्ञान और संस्कार से समृद्ध करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आग्रह किया। साथ ही वर्तमान प्राचार्य की कार्यशैली पर संतोष व्यक्त करते हुए महाविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण निरंतर बने रहने की कामना की।
कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर प्रसाद ने किया। उन्होंने प्लेटिनम जुबली वर्ष के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पूरे होना महाविद्यालय के लिए गौरव का अवसर है। पूरे वर्ष शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से महाविद्यालय की गौरवशाली यात्रा को याद किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इसके साथ ही प्लेटिनम जुबली व्याख्यानमाला के दूसरे दिन का कार्यक्रम गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।




