साहिबगंज महाविद्यालय की 75 वर्षों की विरासत पर व्याख्यानमाला का शुभारंभ।
पूर्व छात्रों ने साझा किए संस्मरण, विद्यार्थियों को अनुशासन, निरंतर अध्ययन और सकारात्मक सोच का दिया संदेश।

साहिबगंज। साहिबगंज महाविद्यालय के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्लेटिनम जुबली समारोह के तहत मंगलवार को नंदन भवन में व्याख्यानमाला का भव्य शुभारंभ हुआ। प्रथम सत्र का विषय “साहिबगंज महाविद्यालय का स्वर्णिम इतिहास” रहा। इस दौरान महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास, शैक्षणिक उपलब्धियों, छात्र जीवन की स्मृतियों और संस्थान की समृद्ध परंपराओं पर वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के स्नातकोत्तर हिंदी विभागाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव, कुलानुशासक, वित्त पदाधिकारी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता व संकायाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिन्हा तथा बीएसके कॉलेज, बरहरवा के जंतु विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. चंदन बोहरा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने मुख्य वक्ताओं एवं अतिथियों का अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर स्वागत करते हुए किया। उन्होंने कहा कि प्लेटिनम जुबली के अवसर पर आयोजित यह व्याख्यानमाला महाविद्यालय के गौरवशाली अतीत और वर्तमान पीढ़ी के बीच संवाद स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
डॉ. चंदन बोहरा ने वर्ष 1978 के अपने छात्र जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने उस समय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक वातावरण, अध्ययन-अध्यापन की परंपरा और छात्र जीवन से जुड़े अनुभवों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में महाविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक चेतना विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।वहीं डॉ. विनय कुमार सिन्हा ने अपने छात्र जीवन और गुरुजनों से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन, निरंतर अध्ययन और सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी को जीवन का आधार बनाकर विद्यार्थी बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने साहिबगंज महाविद्यालय की 75 वर्षों की यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों और शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्लेटिनम जुबली केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए नई दिशा तय करने का भी महत्वपूर्ण पड़ाव है।उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर सुधार की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

व्याख्यानमाला में पूर्व छात्रों के अनुभव और संस्मरण विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। वक्ताओं ने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि महाविद्यालय से प्राप्त शिक्षा, संस्कार और गुरुजनों का मार्गदर्शन जीवनभर प्रेरणा देता है।कार्यक्रम ने महाविद्यालय की 75 वर्षों की विरासत को वर्तमान और नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य किया। विद्यार्थियों को संस्थान के इतिहास और उपलब्धियों को करीब से जानने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का संचालन बीएड विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. नितिन कुमार घोष ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने किया।
इस अवसर पर मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव ज्योति कुमार सिंह, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. मरियम हेंब्रम, डॉ. सेमी विक्टर मरांडी, डॉ. जीसू हसदा, डॉ. हसनैन, डॉ. सोनू कुमार साहू, डॉ. रीना कुमारी, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. रूपा सहित महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

प्लेटिनम जुबली वर्ष में शुरू हुई यह व्याख्यानमाला साहिबगंज महाविद्यालय की 75 वर्षों की शैक्षणिक विरासत, उपलब्धियों और गौरवशाली परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है।




