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झारखंड

कालाजार के बढ़ते मामलों पर स्वास्थ्य विभाग सख्त, महादेवपुर और डुमरचीर में विशेष अभियान तेज।

फील्ड विजिट, मेडिकल कैंप और रात्रि चौपाल के माध्यम से जागरूकता व उपचार पर जोर, सैंडफ्लाई सर्वे से तैयार होगी नई रणनीति।

पाकुड़ जिले में कालाजार (विसरल लीशमैनियासिस) के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सदर प्रखंड के महादेवपुर तथा अमड़ापाड़ा प्रखंड के डुमरचीर गांव में विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत फील्ड विजिट, मेडिकल कैंप और रात्रि चौपाल का आयोजन कर रोग की रोकथाम और उपचार पर विशेष ध्यान दिया गया।

यह अभियान जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार के नेतृत्व में संचालित किया गया। इस दौरान एमओआईसी अमड़ापाड़ा, एमओआईसी सदर, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शिवम, जिला बीवीडी कंसल्टेंट अंकित कुमार, केटीएस ज्योतिन मुर्मू सहित स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम सक्रिय रूप से मौजूद रही।

फील्ड विजिट के दौरान स्वास्थ्य टीम ने प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान की। संदिग्ध मरीजों की मौके पर जांच की गई और आवश्यकतानुसार उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। साथ ही ग्रामीणों को कालाजार के लक्षण, बचाव के उपाय और समय पर इलाज के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

अभियान के तहत एंटोमोलॉजिकल सर्वे भी किया गया, जिसमें क्षेत्र में सैंडफ्लाई (कालाजार फैलाने वाले कीट) की घनत्व का आकलन किया गया। इन आंकड़ों के आधार पर आगे की नियंत्रण रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

अमड़ापाड़ा प्रखंड में आयोजित रात्रि चौपाल के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया गया। इस दौरान लोगों को समय पर जांच कराने, पूरा इलाज लेने और आईआरएस (इंडोर रेजिडुअल स्प्रे) जैसे उपायों के महत्व के बारे में बताया गया। ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं और सुझाव साझा किए।

जिला बीवीडी पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार ने बताया कि कालाजार उन्मूलन के लिए लगातार निगरानी, सक्रिय केस खोज और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है, ताकि इस बीमारी पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग की इस सक्रिय पहल से प्रभावित क्षेत्रों में कालाजार के खिलाफ लड़ाई को मजबूती मिल रही है। जागरूकता, समय पर जांच और समुचित उपचार के जरिए इस गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास जारी हैं।

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