समाहरणालय परिसर में आयुष हर्बल गार्डन का भव्य उद्घाटन, जागरूकता रथ को दिखाई गई हरी झंडी।
औषधीय पौधों के संरक्षण और आयुष पद्धति के प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल, जिलेभर में चलेगा जागरूकता अभियान।

पाकुड़ ।समाहरणालय परिसर में आयुष विभाग की पहल पर स्थापित आयुष हर्बल गार्डन का आज विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार एवं पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर गार्डन का उद्घाटन किया।
उद्घाटन के पश्चात दोनों अधिकारियों ने आयुष जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ जिलेभर में भ्रमण कर आमजन को आयुष चिकित्सा पद्धतियों, योग तथा औषधीय पौधों के महत्व के प्रति जागरूक करेगा।

उपायुक्त मनीष कुमार ने इस अवसर पर कहा कि आयुष हर्बल गार्डन की स्थापना एक सराहनीय कदम है, जो लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय पौधों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है और आयुष प्रणाली इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि इस हर्बल गार्डन के माध्यम से लोगों को औषधीय पौधों की पहचान, उपयोगिता एवं उनके संरक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त होगी। साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए योग एवं आयुष पद्धतियों को दैनिक जीवन में शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस जागरूकता अभियान से जुड़कर अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
जिला आयुष पदाधिकारी डॉ. विपिन चंद्र गुप्ता ने बताया कि हर्बल गार्डन के माध्यम से आमजन को औषधीय पौधों की पहचान, उनकी उपयोगिता तथा संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयुष विभाग विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से लोगों को जोड़ने का लगातार प्रयास कर रहा है।

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. सुजीत कुमार चौहान, डॉ. सौरभ विश्वास, डॉ. कुलेश कुमार, योग प्रशिक्षक जगरनाथ दास, मिथुन, गणपत सहित अन्य आयुष कर्मी उपस्थित रहे।
आयुष हर्बल गार्डन की स्थापना और जागरूकता रथ की शुरुआत जिले में स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम माना जा रहा है।




