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झारखंड

राजमहल पहाड़ियों में छात्राओं का भू-वैज्ञानिक शैक्षणिक भ्रमण, करोड़ों वर्ष पुराने जीवाश्मों का किया अध्ययन।

मॉडल कॉलेज राजमहल के प्राचार्य सह भू-वैज्ञानिक ने कराया मार्गदर्शन, कोलकाता की छात्राओं ने किया चार दिवसीय फील्ड सर्वे।

साहिबगंज।झारखंड के ऐतिहासिक एवं भू-वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राजमहल हिल्स क्षेत्र में कोलकाता स्थित सरोजिनी नायडू कॉलेज फॉर विमेन के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग की छात्राओं का चार दिवसीय भू-सर्वेक्षण एवं भौगोलिक अध्ययन कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

इस शैक्षणिक भ्रमण का नेतृत्व विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तुहिन रॉय ने किया, जबकि मॉडल कॉलेज राजमहल के प्राचार्य सह भू-वैज्ञानिक डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने छात्राओं को क्षेत्र के प्रमुख भू-वैज्ञानिक स्थलों का विस्तृत भ्रमण कराया।

भ्रमण के दौरान छात्राओं ने राजमहल क्षेत्र के प्रसिद्ध जीवाश्म स्थलों का दौरा कर करोड़ों वर्ष पुराने जीवाश्मों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने जीवाश्मों के निर्माण, संरचना तथा उनके वैज्ञानिक महत्व को गहराई से समझा।

डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र विशेष रूप से पैलियॉन्टोलॉजी और भू-विज्ञान के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां प्राचीन वनस्पतियों एवं जीवों के अवशेष आज भी सुरक्षित रूप में पाए जाते हैं।

चार दिवसीय इस फील्ड अध्ययन कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने—भौतिक एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण भू-आकृतिक अध्ययन जलवायु एवं मिट्टी विश्लेषण चट्टानों एवं खनिजों का संग्रह पर्यावरणीय अध्ययन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक कार्य किया।

छात्राओं ने गंगा नदी के तट पर जाकर नदी की गहराई (Depth) एवं जलधारा की गति (Velocity) का वैज्ञानिक मापन भी किया। इससे उन्हें जल-भूगोल (Hydrology) के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

डॉ. तुहिन रॉय ने इस कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के फील्ड सर्वेक्षण से छात्राओं को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में अध्ययन का अनुभव भी मिलता है, जो उनके समग्र शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राजमहल पहाड़ियों में आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इस तरह के कार्यक्रम न केवल भू-विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाते हैं, बल्कि छात्रों को अनुसंधान एवं क्षेत्रीय अध्ययन के प्रति भी प्रेरित करते हैं।

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