बकरी पालन से बदली किस्मत: शायनारा बीबी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल।
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का लाभ लेकर 5 से 10 बकरियों तक पहुंचीं, अब नियमित आय से मजबूत हो रही आर्थिक स्थिति।

पाकुड़ जिले के झीकरहट्टी पूर्वी पंचायत अंतर्गत इस्लामपुर गांव की निवासी शायनारा बीबी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बल पर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में एक नई पहचान भी बनाई है।
शायनारा बीबी को मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत संचालित बकरा विकास योजना का लाभ मिला, जिसके तहत उन्हें अनुदानित दर पर 4 बकरियां और 1 बकरा प्रदान किया गया। इस अवसर को उन्होंने गंभीरता से लेते हुए बकरी पालन का कार्य शुरू किया।
समय के साथ अपनी देखभाल, समर्पण और मेहनत के बल पर उन्होंने अपने पशुधन की संख्या बढ़ाकर 10 बकरियों तक पहुंचा दी। बकरियों की बिक्री से उन्हें नियमित आय होने लगी, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।
आज शायनारा बीबी न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उनके इस प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि सही दिशा और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
इस अवसर पर शायनारा बीबी ने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का सशक्त अवसर प्रदान किया है।
शायनारा बीबी की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और योजनाओं का सही लाभ उठाया जाए, तो छोटी शुरुआत भी बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।




