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झारखंड

दलहन उत्पादन बढ़ाने को लेकर आत्मा साहिबगंज का एक दिवसीय पदाधिकारी प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों पर दिया गया जोर।

राजमहल साहिबगंज। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) साहिबगंज के तत्वावधान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (दलहन) योजना के अंतर्गत सोमवार को एक दिवसीय पदाधिकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण राजमहल प्रखंड के लालमाटी स्थित कृषक पाठशाला के प्रशिक्षण भवन में आयोजित हुआ, जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए कृषि पदाधिकारियों और कर्मियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक (आत्मा) प्रमोद एक्का की उपस्थिति रही। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के अंतर्गत संचालित दलहन योजना की विभिन्न गतिविधियों, उद्देश्यों और कार्यान्वयन प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही कृषि क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों को अपनाने और किसानों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों ने कृषक पाठशाला परिसर में विकसित समेकित कृषि विकास मॉडल का भी अवलोकन किया। प्रक्षेत्र भ्रमण के माध्यम से उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इस दौरान मल्चिंग तकनीक के माध्यम से लगाए गए उच्च मूल्य की फसलों की खेती के बारे में विस्तार से बताया गया।

इसके अलावा पशु संसाधन विकास के लिए निर्मित विभिन्न प्रकार के शेड एवं संरचनाओं का भी निरीक्षण कराया गया, जिससे कृषि और पशुपालन के समन्वित विकास की जानकारी प्रतिभागियों को मिल सके। अधिकारियों को बताया गया कि समेकित कृषि प्रणाली अपनाने से किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ कृषि उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला योजना एवं मूल्यांकन पदाधिकारी अरुण कुमार भोक्ता, उप परियोजना निदेशक मंटू कुमार सहित जिला आत्मा एवं कृषि कार्यालय के सभी कर्मी उपस्थित रहे। इसके अलावा साहिबगंज जिले के सभी प्रखंडों से प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, सहायक तकनीकी प्रबंधक तथा विभिन्न प्रखंडों के पौध संरक्षण केंद्रों के कर्मियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि पदाधिकारियों को दलहन उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग तथा किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित करना था, ताकि जिले में कृषि विकास को नई दिशा मिल सके।

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