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झारखंड

स्वस्थ जीवन की दिशा में आयुष विभाग की पहल: जिलेभर में 35 स्थानों पर योग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित।

योग, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए किया गया प्रेरित।

पाकुड़।“स्वस्थ शरीर ही सफल जीवन की आधारशिला है” — इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए आयुष विभाग, पाकुड़ द्वारा जिले में योग एवं आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संतुलित और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना है।

आयुर्विद्या कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को जिले के विभिन्न प्रखंडों में व्यापक स्तर पर योग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पाकुड़, पाकुड़िया, हिरणपुर, महेशपुर, लिट्टीपाड़ा और अमड़ापाड़ा सहित कुल 35 स्थानों पर प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों द्वारा आम नागरिकों को योगाभ्यास कराया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और योग के महत्व को समझते हुए नियमित अभ्यास करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम तथा ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया। साथ ही उन्होंने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का एक प्रभावी माध्यम है। नियमित योगाभ्यास से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति सकारात्मक सोच के साथ स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने में सक्षम बनता है।

आयुष विभाग के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय की व्यस्त और भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। योग न केवल अनेक बीमारियों से बचाव में सहायक है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और आंतरिक ऊर्जा भी प्रदान करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रतिदिन योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और अपने परिवार तथा समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

आयुष विभाग की इस पहल को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। विभाग का लक्ष्य है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जिले के अधिक से अधिक लोगों तक योग और आयुष चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता पहुंचाई जाए, ताकि एक स्वस्थ, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है

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