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झारखंड

14 महीने बाद जेल से रिहा हुए सैयद अरशद नसर, बोले – “न झुके हैं, न झुकेंगे; संघर्ष रहेगा जारी।

साहिबगंज। चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजमहल विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी सैयद अरशद नसर 14 महीने बाद रविवार को शेखपुरा जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर आते ही उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा, “न हम झुके हैं, न झुकेंगे; न डरे हैं, न डरेंगे। जेल ने हमें कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया है।”

अरशद के खिलाफ जिला खनन पदाधिकारी कृष्ण कुमार किस्कू द्वारा जिरवाबाड़ी थाना में रंगदारी, भयदोहन, ब्लैकमेलिंग, सरकारी संचिका फाड़ने, सरकारी कार्य में बाधा डालने तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत कांड संख्या 104/24 एवं 204/24 दर्ज कराए गए थे। इन मामलों की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में हुई, जहां न्यायाधीश अनिल कुमार चौधरी की पीठ में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उनकी ओर से पैरवी की। साथ ही साहिबगंज एवं शेखपुरा न्यायालयों में भी विभिन्न मामलों में सुनवाई चली। न्यायालय द्वारा नियमित जमानत दिए जाने के बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी।

ज्ञात हो कि अरशद 8 जनवरी 2025 से साहिबगंज जेल में बंद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, अत्याचार, कुव्यवस्था और खराब भोजन व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने के कारण 13 दिसंबर को उन्हें साहिबगंज जेल से मधुपुर जेल स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद 26 फरवरी को उन्हें शेखपुरा जेल भेजा गया।

रिहाई के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में अरशद ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका संघर्ष “भ्रष्ट पुलिस-प्रशासनिक पदाधिकारियों, राजनेताओं और कथित पत्थर, बालू, ईंट, भूमि, कोयला एवं वन माफियाओं” के खिलाफ जारी रहेगा। उन्होंने ऐतिहासिक राजमहल पहाड़ और गंगा नदी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अपने अभियान को और तेज करने की घोषणा की। साथ ही जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया।

अरशद ने साहिबगंज और मधुपुर जेल की स्थिति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “अंग्रेजों के समय का जेल बेहतर था, जबकि आजाद भारत का साहिबगंज और मधुपुर जेल नरक से भी बदतर है।” उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर विस्तृत खुलासा करेंगे।खनन कार्यालय में उनके प्रवेश पर लगी रोक के संबंध में उन्होंने कहा कि वे इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

अरशद की रिहाई के बाद उनके समर्थकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। वहीं प्रशासनिक हलकों और कथित माफिया समूहों में हलचल की चर्चा भी तेज है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।जिले की राजनीति और सामाजिक परिदृश्य में अरशद की सक्रियता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब सबकी नजरें उनके आगामी कदमों पर टिकी हुई हैं।

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