साहिबगंज में ओल (कंद) वितरण अभियान का शुभारंभ, 205 किसानों को मिलेगा लाभ।
JSLPS एवं कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से कंद फसलों के उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की पहल।

साहिबगंज। जिले में किसानों की आय में वृद्धि तथा कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ओल (कंद) वितरण अभियान की शुरुआत की गई है। JSLPS एवं कृषि विभाग के अभिसरण से साहिबगंज जिले के बरहेट, बरहरवा, मंडरो, पतना, राजमहल एवं उधवा प्रखंडों के कुल 205 कृषकों के बीच उन्नत किस्म के ओल (कंद) का वितरण किया जा रहा है।
इसी क्रम में आज बरहेट प्रखंड मुख्यालय में वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में बरहेट प्रखंड प्रमुख सह प्रखंड अध्यक्ष बर्नार्ड मरांडी, उप प्रमुख रूपक शाह, कुसमा पंचायत के मुखिया, उद्यान विभाग के प्रतिनिधि तथा क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रखंड प्रमुख बर्नार्ड मरांडी ने कहा कि ओल की वैज्ञानिक एवं उन्नत तकनीक से की जाने वाली खेती किसानों के लिए आय वृद्धि का सशक्त माध्यम सिद्ध हो सकती है। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने, उन्नत बीजों का उपयोग करने तथा सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि परंपरागत खेती के साथ-साथ कंद फसलों का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा और किसानों को स्थायी आय का अवसर देगा।
कार्यक्रम के दौरान उद्यान विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को बीजोपचार की वैज्ञानिक विधि, उचित रोपण दूरी, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई पद्धति तथा कीट एवं रोग नियंत्रण से संबंधित विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रदान की। किसानों को यह भी बताया गया कि सही तकनीक अपनाने से उत्पादन में वृद्धि के साथ गुणवत्ता में भी सुधार संभव है।
किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएँ उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ-साथ स्थायी आय अर्जित करने में सहायक सिद्ध होंगी। कई किसानों ने बताया कि उन्नत किस्म के कंद मिलने से वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में कंद फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देना, कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करना तथा किसानों की आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित करना है। प्रशासन एवं संबंधित विभागों की इस संयुक्त पहल को किसानों को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस और सराहनीय कदम माना जा रहा है।




