राजमहल मानिकचक फेरी घाट की बंदोबस्ती झारखंड में नहीं होने से भारी राजस्व क्षति।
सदन में गूंजा मुद्दा, विधायक मो. ताजुद्दीन ने उठाई “एक वर्ष बंगाल–एक वर्ष झारखंड” मॉडल की मांग।

राजमहल साहिबगंज। झारखंड पश्चिम बंगाल की सीमा पर गंगा नदी में संचालित राजमहल–मानिकचक फेरी सेवा की बंदोबस्ती केवल पश्चिम बंगाल में होने के कारण झारखंड को भारी राजस्व क्षति का सामना करना पड़ रहा है। इस महत्वपूर्ण विषय को राजमहल विधायक मो. ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा ने विधानसभा के सदन में प्रमुखता से उठाया।
विधायक ने सदन को अवगत कराया कि वर्तमान में राजमहल (झारखंड) से मानिकचक (पश्चिम बंगाल) के बीच गंगा नदी पर संचालित फेरी सेवा की बंदोबस्ती झारखंड में नहीं होती है। परिणामस्वरूप, इस महत्वपूर्ण परिवहन सेवा से प्राप्त होने वाला संपूर्ण राजस्व पश्चिम बंगाल को प्राप्त होता है, जबकि झारखंड को उसका वैधानिक हिस्सा नहीं मिल पाता।विधायक ने सरकार से मांग की कि जिस प्रकार साहिबगंज–मनिहारी फेरी सेवा में एक वर्ष बिहार और एक वर्ष झारखंड द्वारा बंदोबस्ती की व्यवस्था लागू है, उसी तर्ज पर राजमहल–मानिकचक फेरी सेवा में भी “एक वर्ष बंगाल, एक वर्ष झारखंड” मॉडल लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से न केवल दोनों राज्यों के बीच राजस्व संतुलन स्थापित होगा, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।विधायक एमटी राजा ने कहा कि यह फेरी सेवा प्रतिदिन हजारों यात्रियों के आवागमन का प्रमुख माध्यम है। इसके माध्यम से स्थानीय व्यापार, छोटे व्यवसाय और अंतरराज्यीय आर्थिक गतिविधियां भी संचालित होती हैं। ऐसे में झारखंड को अपने हिस्से का राजस्व प्राप्त होना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल आय का विषय नहीं, बल्कि राज्य के अधिकार, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और सीमावर्ती क्षेत्र के विकास से जुड़ा प्रश्न है।झारखंड सरकार के राजस्व विभाग ने विधायक के प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वीकार किया है कि झारखंड में बंदोबस्ती नहीं होने के कारण राज्य को राजस्व क्षति हो रही है। विभाग ने जानकारी दी कि संयुक्त बिहार राज्य के समय संबंधित सचिव के माध्यम से फेरी घाट संचालन का अधिकार पश्चिम बंगाल को प्रदान किया गया था। बाद में न्यायालय के एक निर्णय के आधार पर वर्तमान व्यवस्था जारी है।
विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि वर्तमान परिस्थितियों की समग्र समीक्षा कर आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक पहल की जाए, ताकि झारखंड में भी विधिसम्मत बंदोबस्ती की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके और राज्य को होने वाली राजस्व क्षति पर रोक लगाई जा सके।सदन में इस मुद्दे के उठने के बाद अब सरकार से ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों और स्थानीय व्यापारियों की नजरें भी इस विषय पर होने वाले निर्णय पर टिकी हुई हैं।




