उपायुक्त की अध्यक्षता में ‘जल महोत्सव पखवाड़ा’ के तहत भव्य कार्यशाला, जल संरक्षण का संदेश लेकर जल रथ रवाना।
जल प्रबंधन और वर्षा जल संचयन पर जागरूकता बढ़ाने की पहल, उत्कृष्ट कार्य करने वाली पाँच जल सहियाओं को किया गया सम्मानित।

पाकुड़। जिला प्रशासन एवं पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, पाकुड़ के संयुक्त तत्वावधान में ‘जल महोत्सव पखवाड़ा’ के अंतर्गत सोमवार को रवीन्द्र भवन, पाकुड़ में एक दिवसीय भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त मनीष कुमार ने की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, जल प्रबंधन एवं वर्षा जल संचयन के प्रति आमजन में व्यापक जागरूकता फैलाना तथा लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी एवं पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अनंत प्रसाद सिंह ने हरी झंडी दिखाकर ‘जल रथ’ को रवाना किया। यह जल रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं गांवों का भ्रमण करते हुए लोगों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा जल की बर्बादी रोकने के प्रति जागरूक करेगा।

जल रथ के माध्यम से जल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश आमजन तक पहुंचाए जाएंगे और लोगों को इस जनअभियान से जोड़ते हुए सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले के प्रत्येक गांव और मोहल्ले तक जल संरक्षण का संदेश पहुंचे और लोग जल बचाने के लिए स्वयं आगे आएं।
कार्यक्रम के दौरान जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पाँच जल सहियाओं को उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उपायुक्त ने जल सहियाओं के समर्पण, मेहनत और जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के इस अभियान को मजबूत बनाने में जल सहियाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जल जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ‘जल महोत्सव पखवाड़ा’ केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक जनअभियान है। इसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना और उन्हें ‘जल प्रहरी’ के रूप में प्रेरित करना है।
उपायुक्त ने आगे कहा कि जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सामुदायिक भागीदारी बेहद आवश्यक है। यदि सरकार, पंचायत प्रतिनिधि और आम जनता मिलकर प्रयास करें, तो जल संरक्षण के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने सभी विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण, जल प्रबंधन तथा वर्षा जल संचयन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने जल संसाधनों के संरक्षण, जल के समुचित उपयोग और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए। उनका कहना था कि यदि समय रहते जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में जल संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है।
इस अवसर पर जिला प्रशासन के कई पदाधिकारी, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, जल सहिया, स्वयंसेवी संगठन के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से जिले में जल संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक संदेश गया और लोगों को इस महत्वपूर्ण अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।




