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झारखंड

उच्च न्यायालय में लंबित वादों की उपायुक्त ने की गहन समीक्षा, एक सप्ताह में प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश।

विभागवार मामलों की समीक्षा, न्यायालय के आदेशों के समयबद्ध अनुपालन और लापरवाही पर जवाबदेही तय करने की चेतावनी।

पाकुड़। उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को उच्च न्यायालय में लंबित वादों की समीक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला विधि शाखा द्वारा विभिन्न विभागों से जुड़े उन सभी मामलों की विभागवार सूची प्रस्तुत की गई, जिनमें अब तक सरकार की ओर से प्रतिशपथ पत्र (काउंटर एफिडेविट) दाखिल किया जाना लंबित है।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान केंद्रित किया, जिनमें अब तक सरकार का पक्ष रखते हुए प्रतिशपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया है। समीक्षा के उपरांत उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उपायुक्त ने सभी विभागीय पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन मामलों में अब तक प्रतिशपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया है, उनमें एक सप्ताह के भीतर प्रतिशपथ पत्र दायर करने की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि न्यायालय के समक्ष सरकार का पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।

उन्होंने कहा कि तथ्य विवरणी (फैक्ट रिपोर्ट) के अनुमोदन के क्रम में सभी संबंधित पदाधिकारी याचिका में उठाए गए बिंदुओं के अनुरूप कंडिकावार तथ्य विवरणी तैयार करें तथा उसकी गहन समीक्षा सुनिश्चित करें। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि रिपोर्ट में सभी तथ्यों का स्पष्ट, सटीक और समुचित उल्लेख हो। इसके बाद ही तथ्य विवरणी का अनुमोदन कर उसे उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिशपथ पत्र दाखिल होने के बाद न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में विलंब होता है और इसके कारण अवमानना वाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित पदाधिकारी अथवा कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों की नियमित निगरानी की जाए तथा न्यायालयी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। हर मामले में निर्धारित समयसीमा का विशेष रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।बैठक में जिला विधि शाखा के पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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