टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के लैब टेक्नीशियनों के नियमितीकरण की मांग तेज, राजमहल विधायक एमटी राजा ने विधानसभा में उठाया मुद्दा।
20–25 वर्षों से सेवा दे रहे लैब टेक्नीशियन आज भी अस्थायी पद पर कार्यरत, विधायक ने सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

साहिबगंज। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत विगत दो से ढाई दशकों से कार्यरत लैब टेक्नीशियनों के नियमितीकरण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे को राजमहल विधानसभा क्षेत्र के विधायक मो. ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा ने झारखंड विधानसभा में जोरदार ढंग से उठाते हुए सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया।
विधायक ने सदन में कहा कि टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में लैब टेक्नीशियनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। ये कर्मी पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आज भी वे अस्थायी स्थिति में कार्य करने को विवश हैं। इतने लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी इनके नियमितीकरण की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं होना चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि नियमितीकरण नहीं होने के कारण इन लैब टेक्नीशियनों को कई महत्वपूर्ण सेवा सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। इनमें भविष्य निधि (पीएफ), नियमित वेतनमान में वृद्धि, अवकाश नियमावली का लाभ, चिकित्सा सुविधाएं तथा अन्य वैधानिक सेवा लाभ शामिल हैं। वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलना उनके साथ अन्याय के समान है।
विधायक एमटी राजा ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े इन कर्मियों के योगदान को देखते हुए उनके हितों की रक्षा के लिए शीघ्र सकारात्मक पहल की जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से झारखंड राज्य के स्वास्थ्य विभाग से आग्रह किया कि इन लैब टेक्नीशियनों के नियमितीकरण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए, ताकि उन्हें भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह सभी वैधानिक अधिकार और सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में इन कर्मियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए सरकार को मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए इनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में जल्द निर्णय लेना चाहिए।




