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झारखंड

सूक्ष्म टपक सिंचाई से बदली कोनिका दीदी की जिंदगी, आधुनिक खेती से बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा।

पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत सीतारामपुर गांव की रहने वाली कोनिका कोड़ाइन की कहानी आज ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में घर-गृहस्थी तक सीमित रहने वाली कोनिका दीदी ने आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाकर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी नई दिशा दिखाई है।

वर्ष 2021 में गांव में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान कोनिका दीदी “दीदी सागेन साकाम आजीविका सखी मंडल” से जुड़ीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत की शुरुआत की और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।

इसके बाद झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के अंतर्गत संचालित जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (JICA) परियोजना से जुड़ने का अवसर मिला। इस परियोजना के तहत उन्हें सूक्ष्म टपक सिंचाई यंत्र, बर्मी कम्पोस्ट यूनिट और पॉली नर्सरी हाउस उपलब्ध कराया गया।

शुरुआत में उन्हें इस नई तकनीक पर ज्यादा भरोसा नहीं था, लेकिन JSLPS द्वारा रांची जिले के ओरमांझी और अनगड़ा प्रखंड के प्रगतिशील किसानों के खेतों का भ्रमण कराने के बाद उनका दृष्टिकोण बदला और उन्होंने आधुनिक खेती को अपनाने का निर्णय लिया।इसके बाद कोनिका दीदी ने पहली बार अपने 25 डिसमिल भूमि पर सूक्ष्म टपक सिंचाई तकनीक से तरबूज की खेती की। इस फसल से उन्हें करीब 47,400 रुपये की शुद्ध आमदनी हुई। इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाने का फैसला किया।

जनवरी 2026 में उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में सूक्ष्म टपक सिंचाई तकनीक से तरबूज और खीरा की खेती शुरू की। वर्तमान में खीरे की तुड़ाई शुरू हो चुकी है। अब तक लगभग 5 क्विंटल खीरा मुरारई और नलहट्टी बाजार में औसतन 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचकर वे 32,500 रुपये की आमदनी कर चुकी हैं। आने वाले समय में इस फसल से 1 लाख से 1.20 लाख रुपये तक की आय होने की संभावना है।वहीं दूसरी ओर तरबूज की फसल में भी फूल आना शुरू हो गया है, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है।

आज कोनिका दीदी की सफलता न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रही है, बल्कि क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और दृढ़ संकल्प के साथ खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।अपनी इस सफलता पर कोनिका दीदी ने JSLPS एवं JICA परियोजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समूह से जुड़ने, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के कारण ही वे आज आत्मनिर्भर बन पाई हैं।

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