संरक्षित फूलों की खेती से बदली तकदीर: प्रगतिशील किसान उत्तम सहाजी बने आत्मनिर्भरता की मिसाल ।
उद्यान विभाग के सहयोग से आधुनिक खेती की ओर बढ़ा सशक्त कदम, आय में कई गुना वृद्धि की संभावना।

पाकुड़ । झारखंड सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को साकार करने की दिशा में पाकुड़ जिला लगातार प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। इसी क्रम में पाकुड़ प्रखंड के मनीरामपुर ग्राम के प्रगतिशील किसान उत्तम सहाजी ने संरक्षित खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं।
उत्तम सहाजी पहले पारंपरिक खेती के तहत सब्जी एवं स्ट्रॉबेरी की खेती करते थे, जिससे उन्हें वार्षिक लगभग 60 हजार रुपये की आय होती थी। बढ़ती लागत और सीमित आमदनी के बीच उन्होंने कुछ नया करने का निश्चय किया।
उद्यान विभाग, पाकुड़ के तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन से उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया। इसके तहत उन्होंने 1000 वर्गमीटर क्षेत्र में शेड नेट हाउस स्थापित कर जरबेरा फूलों की संरक्षित खेती की शुरुआत की।

संरक्षित खेती पद्धति अपनाने से उन्हें कई महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त हुए—कम पानी में अधिक उत्पादन, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, नियंत्रित कीटनाशक उपयोग, बेहतर गुणवत्ता वाले फूलों का उत्पादन, उत्पादन लागत में कमी इन सभी कारणों से उनकी खेती अधिक लाभकारी साबित हो रही है।
वर्तमान में जरबेरा फूलों की खेती से उत्तम सहाजी की आय में तेजी से वृद्धि हो रही है। अनुमान है कि इस आधुनिक खेती से उनकी वार्षिक आय 1.5 लाख रुपये से अधिक हो सकती है। भविष्य में उत्पादन एवं विपणन के सुदृढ़ होने के साथ उनकी आय और भी बढ़ने की उम्मीद है।
उत्तम सहाजी ने अपनी सफलता का श्रेय सरकार एवं उद्यान विभाग को देते हुए कहा उद्यान विभाग के सहयोग से मुझे नई तकनीक सीखने और अपनाने का अवसर मिला। अब मैं कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन कर पा रहा हूं और अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा हूं। इसके लिए मैं सरकार और विभाग का हृदय से आभारी हूं।
उद्यान विभाग, पाकुड़ द्वारा जिले के किसानों के साथ समन्वय स्थापित कर संरक्षित खेती, बागवानी एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।यह सफलता की कहानी न केवल एक किसान के संघर्ष और संकल्प की गाथा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।




