साहिबगंज में MACT पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित, पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा दिलाने पर जोर।
पुलिस, न्यायालय और बीमा कंपनियों के समन्वय से ही संभव है त्वरित न्याय — वक्ताओं ने बताए नए कानूनी प्रावधान।

साहिबगंज। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देश तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहिबगंज अखिल कुमार के मार्गदर्शन में व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित लोक अदालत कक्ष में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, साहिबगंज संजय कुमार उपाध्याय, जिला न्यायाधीश सह अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-III शिव करण, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) विजय कुशवाहा, लोक अभियोजक अनुराग शुक्ला एवं चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमारी स्नेहलता द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश संजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि मोटर दुर्घटना से जुड़े मामलों में थाना प्रभारी एवं पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को समय पर न्याय दिलाना और मुआवजा सुनिश्चित करना पुलिस का कानूनी दायित्व है। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों के कागजातों की डीटीओ से जांच कराना, बीमा कंपनी को समय पर सूचना देना तथा आवश्यक प्रतिवेदन उपलब्ध कराना अनिवार्य है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुआवजा का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर उनके जीवनयापन में सहयोग देना है।
इस अवसर पर जिला न्यायाधीश सह अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-III शिव करण ने मोटर दुर्घटना कानूनों में हुए हालिया बदलावों की जानकारी देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज 30 दिनों के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश ऐसा संभव नहीं हो पाता है, तो न्यायालय को इसकी सूचना देना आवश्यक है।

उन्होंने थाना प्रभारियों से अपेक्षा की कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ करें तथा यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को न्यायोचित मुआवजा समय पर प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस पदाधिकारियों एवं बीमा कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय के बिना मुआवजा प्रक्रिया को प्रभावी रूप से लागू करना संभव नहीं है।
कार्यक्रम में एलआरडीसी, परिवहन विभाग के पदाधिकारी, पुलिस पदाधिकारीगण एवं अन्य संबंधित अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




