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झारखंड

साहिबगंज के किसानों के लिए बड़ी पहल: राँची में मुर्गी-बत्तख पालन पर पाँच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू।

आत्मा योजना के तहत 25 किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की पहल, कम लागत में अधिक आय के तरीकों की दी जा रही जानकारी।

साहिबगंज। जिला प्रशासन साहिबगंज द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। आत्मा (ATMA) योजना के अंतर्गत उपायुक्त हेमंत सती के निर्देश पर साहिबगंज जिले के 25 चयनित किसानों को मुर्गी एवं बत्तख पालन विषय पर पाँच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण के लिए राँची स्थित दिव्यायन कृषि विज्ञान केन्द्र भेजा गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 09 मार्च 2026 से 14 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पशुपालन आधारित आजीविका के बेहतर अवसरों से जोड़ना तथा उन्हें वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक तरीके से मुर्गी और बत्तख पालन की जानकारी देना है। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की तकनीक, रोग प्रबंधन, चारा प्रबंधन, आवास व्यवस्था, टीकाकरण, विपणन व्यवस्था तथा आय बढ़ाने के विभिन्न उपायों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण में साहिबगंज जिले के विभिन्न प्रखंडों से ऐसे किसानों का चयन किया गया है जो मुर्गी और बत्तख पालन को एक सफल व्यवसाय के रूप में अपनाने के इच्छुक हैं। कार्यक्रम के दौरान किसानों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे अपने क्षेत्रों में लौटकर आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें और इसे लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित कर सकें।

राँची स्थित दिव्यायन कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषि एवं पशुपालन से संबंधित कई उन्नत विषयों पर नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहाँ किसानों को समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाती है, जिससे किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी तथा अन्य सहायक गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को आधुनिक तकनीकों के उपयोग, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

जिला प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक आजीविका के अवसरों से जोड़ा जाए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। मुर्गी और बत्तख पालन ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत में अधिक आय देने वाला व्यवसाय माना जाता है। इसे अपनाकर किसान अपने परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन किसानों को अपने-अपने क्षेत्रों में मुर्गी और बत्तख पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि अन्य किसान भी इससे प्रेरणा लेकर इस व्यवसाय को अपनाएं। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा जल्द ही साहिबगंज जिले के 25 किसानों का दूसरा दल भी इसी प्रकार के प्रशिक्षण के लिए दिव्यायन कृषि विज्ञान केन्द्र, राँची भेजा जाएगा।

जिला प्रशासन की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने तथा कृषि के साथ-साथ पशुपालन आधारित आजीविका को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में कृषि आधारित उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

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