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झारखंड

राष्ट्रीय लोक अदालत में 9,411 मामलों का त्वरित निपटारा, ₹5.37 करोड़ से अधिक की समझौता राशि प्राप्त।

साहिबगंज एवं राजमहल न्यायमंडल में वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, आपसी सहमति से बड़ी संख्या में लंबित मामलों का समाधान।

साहिबगंज।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के तत्वावधान में शनिवार को साहिबगंज एवं राजमहल व्यवहार न्यायालय परिसरों में वर्ष 2026 की प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लंबित मामलों का आपसी सहमति और समझौते के आधार पर त्वरित निष्पादन किया गया।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत में साहिबगंज न्यायमंडल एवं राजमहल अनुमंडलीय न्यायमंडल को मिलाकर कुल 9,411 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों के समाधान से ₹5,37,83,074 (पाँच करोड़ सैंतीस लाख तिरासी हजार चौहत्तर रुपये) की समझौता राशि प्राप्त हुई, जिससे संबंधित पक्षों को त्वरित राहत मिली।

राष्ट्रीय लोक अदालत का राज्यस्तरीय उद्घाटन ऑनलाइन माध्यम से किया गया, जिसका सीधा प्रसारण साहिबगंज एवं राजमहल व्यवहार न्यायालय स्थित लोक अदालत कक्ष में स्क्रीन के माध्यम से उपस्थित लोगों ने देखा। इस अवसर पर झारखण्ड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के कार्यकारी अध्यक्ष सुझीत नारायण प्रसाद तथा झारखण्ड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रदीप श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन किया।

उद्घाटन के उपरांत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहिबगंज अखिल कुमार ने लोक अदालत के लिए गठित विभिन्न बेंचों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय को आमजन तक सुलभ, सरल और त्वरित रूप से पहुँचाने का एक प्रभावी माध्यम है।उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्यायिक व्यवस्था की ऐसी प्रणाली है, जहाँ वर्षों से लंबित मामलों का समाधान आपसी सहमति, समझौते और सौहार्दपूर्ण वातावरण में किया जाता है। इससे न केवल लोगों को शीघ्र न्याय मिलता है, बल्कि समय, धन और ऊर्जा की भी बचत होती है।उन्होंने आगे बताया कि लोक अदालत में होने वाला समझौता दोनों पक्षों की सहमति से होता है, इसलिए इसका निर्णय दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होता है और इससे आपसी संबंधों में भी मधुरता बनी रहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम होता है तथा इसके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता।

इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय संजय कुमार उपाध्याय, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रथम शेखर कुमार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सिंधु नाथ लामाये, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अभिषेक प्रसाद, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत, सिविल जज-सह-न्यायिक दंडाधिकारी आलोक मरांडी, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सुमित कुमार वर्मा, रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी राहुल कुमार, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राकेश कुमार मिश्रा, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रेम नाथ तिवारी, चीफ लीगल एड डिफेन्स काउंसिल अरविंद गोयल सहित उनकी टीम उपस्थित रही।इसके अलावा बड़ी संख्या में अधिवक्ता, बैंक कर्मी, विभिन्न विभागों के अधिकारी, पारा विधिक स्वयंसेवक तथा वादकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों का आपसी सहमति से समाधान होने से न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिली। अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि वे इस प्रकार के आयोजनों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और आपसी समझौते के माध्यम से अपने मामलों का शीघ्र निष्पादन कराएं।

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