मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना: पाकुड़ में किसानों को मिला सशक्तिकरण का नया साधन।
पाकुड़ समाहरणालय परिसर में दो ट्रैक्टरों का वितरण, किसानों में खुशी की लहर।

पाकुड़ । वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतर्गत भूमि संरक्षण कार्यालय, पाकुड़ द्वारा संचालित मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना के तहत बुधवार को समाहरणालय परिसर में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार के हाथों दो बड़े ट्रैक्टरों का वितरण किया गया, जिससे लाभुक किसानों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम में परियोजना निदेशक आईटीडीए अरुण कुमार एक्का, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) प्रवीण मिश्रा, पाकुड़ विधायक प्रतिनिधि गुलाम अहमद तथा भूमि संरक्षण पदाधिकारी सुचित एक्का सहित अन्य गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।
इस योजना के तहत रोमाना स्वयं सहायता समूह, भवानीपुर (पाकुड़) एवं शांति लता स्वयं सहायता समूह, पाकुड़िया को ट्रैक्टर प्रदान किए गए। इससे न केवल कृषि कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना के अंतर्गत किसानों को ट्रैक्टर पर 50% तक अनुदान तथा अन्य कृषि यंत्रों पर 80% तक अनुदान का प्रावधान है। इस पहल से आधुनिक कृषि उपकरण अब किसानों के लिए अधिक सुलभ हो गए हैं, जिससे खेती की लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि संभव हो रही है।

ट्रैक्टर प्राप्त करने के बाद लाभुक किसानों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना से खेती-किसानी में गति आएगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उपायुक्त मनीष कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि के आधुनिकीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग से खेती को अधिक आसान, सुलभ और लाभकारी बनाया जा सकता है।
उन्होंने लाभुक किसानों से अपील की कि वे इन संसाधनों का सही उपयोग करें और अन्य किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करें।
इस योजना के माध्यम से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा और मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रही है।




