मलेरिया एवं वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर जिला स्तरीय बैठक आयोजित, समन्वय और जागरूकता पर विशेष जोर।
सिविल सर्जन कार्यालय में हुई बैठक में विशेषज्ञों ने साझा की रणनीतियां, फील्ड स्तर पर कार्यों को और मजबूत करने के निर्देश।

पाकुड़। मलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम, नियंत्रण एवं उन्मूलन को लेकर जिला स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार ने की।
यह बैठक स्वास्थ्य विभाग एवं चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट (CINI) के संयुक्त सहयोग से आयोजित की गई, जिसमें जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में मलेरिया सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीतियों को और अधिक सुदृढ़ करना था। इस दौरान फील्ड स्तर पर चल रही गतिविधियों, रोगों की निगरानी (सर्विलांस), समय पर जांच एवं उपचार की स्थिति तथा कार्यान्वयन में आ रही चुनौतियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपने अनुभव साझा किए और कार्य प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार ने एकीकृत वेक्टर प्रबंधन (Integrated Vector Management) की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मलेरिया जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाना जरूरी है।
उन्होंने कीटनाशक युक्त मच्छरदानियों के नियमित उपयोग, इंडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा समुदाय की सक्रिय सहभागिता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि जन-जागरूकता और फील्ड स्तर पर बेहतर समन्वय से ही इन रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
बैठक के दौरान फील्ड स्टाफ के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज करने तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

इस अवसर पर जिला भीबीडी सलाहकार अंकित कुमार एवं CINI के जिला समन्वयक अमित अग्रवाल सहित कई स्वास्थ्यकर्मी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
यह बैठक जिले में मलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों के खिलाफ चल रहे अभियान को नई दिशा देने वाली साबित होगी। सामूहिक प्रयास, जागरूकता और बेहतर समन्वय के माध्यम से इन रोगों के उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।




