मजदूरी से स्ट्रॉबेरी की खेती तक: कपूर मुनी दीदी बनीं आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल।
सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और आत्मविश्वास के बल पर महेशपुर की महिला किसान ने लिखी सफलता की नई कहानी।

पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत साहेबनगर गांव की रहने वाली कपूर मुनी दीदी आज क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और आधुनिक कृषि की प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं। कभी खेतों में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली कपूर मुनी दीदी ने आज अपनी मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं के सहयोग से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
कपूर मुनी दीदी की आत्मनिर्भर बनने की यात्रा वर्ष 2016 में शुरू हुई। गांव की सीआरपी दीदी के प्रोत्साहन से वे “गुलाब बाहा आजीविका सखी मंडल” नामक स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत की आदत विकसित की और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू किया।इन प्रशिक्षणों के माध्यम से उन्हें आजीविका के नए अवसरों और आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी मिली। धीरे-धीरे उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास मजबूत होता गया और उन्होंने कुछ अलग करने का संकल्प लिया।
वर्ष 2025 में उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) परियोजना के तहत उन्हें सूक्ष्म टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) प्रणाली उपलब्ध कराई गई।इस आधुनिक तकनीक की मदद से उन्होंने अपने लगभग 25 डिसमिल खेत में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती करने का निर्णय लिया।इस पहल में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) और उद्यान विभाग, पाकुड़ ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। विभाग की ओर से उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले स्ट्रॉबेरी के पौधे तथा मल्चिंग प्लास्टिक उपलब्ध कराया गया। वैज्ञानिक पद्धति और आधुनिक तकनीक के प्रयोग से कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन संभव हो सका।
कपूर मुनी दीदी ने अब तक लगभग 15 किलोग्राम स्ट्रॉबेरी का उत्पादन किया है, जिसे उन्होंने स्थानीय बाजार में करीब ₹500 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा। इससे उन्हें लगभग ₹7,500 की आय प्राप्त हुई है।उत्पादन बढ़ने के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि इस सीजन में उन्हें स्ट्रॉबेरी की खेती से ₹40,000 से ₹50,000 तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आने लगा है।

कपूर मुनी दीदी की इस पहल ने क्षेत्र के किसानों में भी नई उत्सुकता पैदा कर दी है। साहेबनगर और आसपास के गांवों के किसान उनके खेत में लगी स्ट्रॉबेरी की क्यारियों को देखने पहुंच रहे हैं और आधुनिक सिंचाई तकनीक तथा उन्नत बागवानी पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग से कम जमीन में भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
कपूर मुनी दीदी ने अपनी सफलता का श्रेय झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), उद्यान विभाग पाकुड़, JICA परियोजना तथा “गुलाब बाहा आजीविका सखी मंडल” की सभी सदस्यों को दिया है।उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सहयोग के कारण ही उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाने और स्ट्रॉबेरी की सफल खेती करने का अवसर मिला।
कपूर मुनी दीदी की यह प्रेरक कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही दिशा में मिले सहयोग से कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकता है।आज उनकी सफलता पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और आधुनिक कृषि की एक नई प्रेरणा बन चुकी है।




