हिरणपुर बाजार में चला बाल श्रम विमुक्ति एवं जागरूकता अभियान, 20 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण।
श्रम विभाग की पहल पर चला विशेष अभियान, दुकानदारों को बाल श्रम निषेध कानून की दी गई जानकारी; उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी।

हिरणपुर पाकुड़। बाल श्रम उन्मूलन एवं बच्चों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से शनिवार को हिरणपुर बाजार क्षेत्र में व्यापक बाल श्रम विमुक्ति एवं जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान श्रम विभाग की पहल पर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, लिट्टीपाड़ा प्रशांत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य बाजार क्षेत्र के दुकानदारों, प्रतिष्ठान संचालकों और आम नागरिकों को बाल श्रम निषेध से संबंधित कानूनों की जानकारी देना तथा बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के प्रति जागरूक करना था।
अभियान के दौरान हिरणपुर बाजार स्थित कई प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया। इस क्रम में शाही दरबार होटल, मुस्कान होटल, रंजीत स्वीट्स, यादव स्वीट्स और इरफान चिकन स्टोर सहित लगभग 20 दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दुकानदारों एवं प्रतिष्ठान संचालकों को बाल श्रम से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी तथा उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों से काम न कराया जाए।
इस मौके पर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी प्रशांत कुमार गुप्ता ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार के कार्य में नियोजित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों को खतरनाक एवं जोखिमपूर्ण कार्यों में लगाना भी कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई नियोजक इन प्रावधानों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में दोषी नियोजक पर 20 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना, अथवा 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास, या फिर दोनों प्रकार की सजा का प्रावधान है।
अभियान के दौरान अधिकारियों ने आम लोगों और व्यवसायियों से भी अपील की कि वे बाल श्रम उन्मूलन के इस प्रयास में प्रशासन का सहयोग करें। साथ ही बच्चों को श्रम में लगाने के बजाय उन्हें विद्यालय भेजने और शिक्षा से जोड़ने की जिम्मेदारी निभाएं।अधिकारियों ने कहा कि समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त किया जा सकता है और बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य प्रदान किया जा सकता




