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झारखंड

हौसले की उड़ान: फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान से बदली दुलाली मुर्मू की जिंदगी, आज बनीं आत्मनिर्भर।

पाकुड़। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फूलो‑झानो आशीर्वाद अभियान ने पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड की रहने वाली दुलाली मुर्मू के जीवन में एक नई रोशनी भर दी है। कभी आर्थिक मजबूरी के कारण चौराहे के किनारे बैठकर हंडिया बेचकर परिवार का गुजारा करने वाली दुलाली आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। उनकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास ने न केवल उनकी जिंदगी बदली है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड की निवासी दुलाली मुर्मू का परिवार बड़ा होने के कारण लंबे समय तक आर्थिक तंगी से जूझता रहा। सीमित संसाधनों के कारण परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए बेहद कठिन था। मजबूरी में उन्हें चौराहे के किनारे बैठकर हंडिया बेचनी पड़ती थी, जिससे होने वाली आय से किसी तरह घर का खर्च चल पाता था।इसी संघर्षपूर्ण जीवन के बीच वर्ष 2025 में उन्हें फूलो‑झानो आशीर्वाद अभियान के तहत 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। यह सहायता उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। इस राशि का उपयोग करते हुए दुलाली मुर्मू ने सुअर पालन (पिगरी) का कार्य शुरू किया।

अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने इस कार्य को सफल बनाया और अब तक लगभग 60,000 रुपये का मुनाफा अर्जित कर चुकी हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब वे सम्मानजनक तरीके से जीवन यापन कर रही हैं।आर्थिक स्थिति को और मजबूत बनाने के लिए दुलाली मुर्मू ने घर पर ही मशरूम उत्पादन की शुरुआत की। इस कार्य में उन्हें Jharkhand State Livelihood Promotion Society का आर्थिक सहयोग तथा The/Nudge Institute का तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।अब तक वे लगभग 14 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन कर बाजार में बेच चुकी हैं, जिससे उनकी आय में और बढ़ोतरी हुई है।

दुलाली मुर्मू ने अपनी आजीविका के स्रोतों को और मजबूत करने के उद्देश्य से सब्जी की खेती की भी शुरुआत की है। Jharkhand State Livelihood Promotion Society के सहयोग और The/Nudge Institute के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने नर्सरी तैयार की है, जिसमें लगभग 5,000 पौधे लगाए गए हैं।आज दुलाली मुर्मू केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे फूलो‑झानो आशीर्वाद अभियान के तहत “नव जीवन सखी” के रूप में भी कार्य कर रही हैं। इस भूमिका में वे अन्य महिलाओं और लाभुकों को सम्मानजनक आजीविका अपनाने तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

दुलाली मुर्मू ने अपनी सफलता का श्रेय झारखंड सरकार की योजनाओं, जिला प्रशासन पाकुड़, Jharkhand State Livelihood Promotion Society और The/Nudge Institute के सहयोग को दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से उन्हें सम्मानजनक आजीविका का अवसर मिला, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकीं और अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर पा रही हैं।

उन्होंने क्षेत्र की अन्य महिलाओं से भी अपील की कि वे सरकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।दुलाली मुर्मू की यह कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, सहयोग और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपने जीवन की दिशा बदलने की क्षमता रखती हैं। उनका संघर्ष और सफलता आज समाज में महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है।

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