सरकंडा उच्च विद्यालय में NDRF का जागरूकता कार्यक्रम: विद्यार्थियों और ग्रामीणों को सिखाई गई जीवनरक्षक तकनीकें।

राजमहल (साहिबगंज)।राजमहल प्रखंड अंतर्गत घाट जमनी एवं मोकिमपुर पंचायत के संयुक्त तत्वावधान में सरकंडा उच्च विद्यालय परिसर में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम द्वारा एक व्यापक, ज्ञानवर्धक एवं अत्यंत उपयोगी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा ग्रामीणों को आकस्मिक आपदाओं और दुर्घटनाओं के समय अपनाई जाने वाली आवश्यक जीवनरक्षक विधियों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
इस अवसर पर NDRF के इंस्पेक्टर रणधीर कुमार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने उपस्थित लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं सही प्राथमिक उपचार देने के महत्व को विस्तारपूर्वक समझाया। टीम के जवानों ने सजीव प्रदर्शन के माध्यम से बताया कि गंभीर चोट लगने की स्थिति में रक्तस्राव को किस प्रकार नियंत्रित किया जाता है, हृदय गति रुक जाने पर CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) किस विधि से दिया जाता है, तथा बाढ़ या जल-जमाव की स्थिति में घरेलू सामानों की सहायता से अस्थायी तैरने के उपकरण कैसे तैयार किए जा सकते हैं।
NDRF टीम ने समझाया कि किसी भी आपदा या दुर्घटना के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि उस समय उपस्थित व्यक्ति प्राथमिक उपचार की सही जानकारी रखते हों, तो अनेक अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है। इसी जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाना इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य रहा।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने स्वयं आगे बढ़कर इन तकनीकों का अभ्यास किया तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। शिक्षकों और ग्रामीणों ने भी बड़े ध्यानपूर्वक इन जीवनरक्षक विधियों को सीखा और भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग करने की प्रतिबद्धता जताई।
इस अवसर पर बीपीओ गगन बापू, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्याम चौरसिया, मोकिमपुर पंचायत की मुखिया सुनीता मुर्मू, गदाई महराजपुर दियारा के मुखिया प्रतिनिधि संजय मंडल, रोजगार सेवक, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार एवं ग्रामीणों ने NDRF टीम के प्रति आभार व्यक्त किया और इस प्रकार के उपयोगी एवं जनहितकारी कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उपस्थित लोगों का मानना था कि इस तरह की जागरूकता ही आपदा के समय समाज को अधिक सुरक्षित, सजग और सक्षम बना सकती है।




